Tuesday, November 20, 2018

भाजपा को गढ़ बचाने और कांग्रेस को भेदने की चुनौती यहां चार मुद्दे पानी

 भोपाल. अब तक के 14 विधानसभा चुनावो में से 11 बार भाजपा और जनसंघ के प्रतिनिधियों को गले लगाने वाली बैरसिया सीट पर इस बार पानी, बिजली, बाहरी और बागी ने गढ़ बचाने की चुनौती खड़ी कर दी है। भाजपा प्रत्याशी को उम्मीद है कि योगी आदित्यनाथ की जल्द होने वाली सभा से स्थिति बदलेगी। आरएसएस की गहरी जड़ों वाली और भाजपा के गढ़ बैरसिया के मतदाताओं में दौड़ रहे अंडर करंट ने इस बार मुश्किल बढ़ा दी है। भाजपा ने मौजूदा विधायक विष्णु खत्री का टिकट बुक किया तो पूर्व विधायक ब्रह्मानंद रत्नाकर बागी हो गए। खत्री को कांग्रेस की जयश्री हरिकरण, बसपा की अनीता अहिरवार के साथ ही निर्दलीय रत्नाकर से चुनौती मिल रही है। रत्नाकर स्थानीय हैं और वे कांग्रेस-भाजपा प्रत्याशियों को बाहरी बताते हुए वोट मांग रहे हैं।

मतदाताओं का मिजाज पर्याप्त बिजली नहीं मिलने, सिंचाई के संसाधन उपलब्ध नहीं होने से तीखा है। 110 पंचायतों में फैली बैरसिया विधानसभा में 304 गांव आते हैं। क्षेत्र में बड़े तालाब, बड़ी नदी या डैम नहीं होने से सिंचाई का पानी उपलब्ध नहीं है। करीब 80 फीसदी ग्रामीण इलाके वाली सीट पर भाजपा के लिए यही सबसे बड़ी परेशानी है। इस मुद्दे को हवा देकर कांग्रेस और निर्दलीय माहौल अपने पक्ष में करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।

रोड़िया गांव में कांग्रेस प्रत्याशी की चुनावी कमान संभाल रहे पूर्व जिलाध्यक्ष (ग्रामीण) अवनीश भार्गव कहते हैं 50 साल बाद भी बैरसिया के ग्रामीण पानी के लिए तरस रहे हैं। पारूवा कलारा डैम बनाने का दावा किया था, जिसका काम अब तक शुरू नहीं हुआ है। अगर हमारी सरकार आई तो डैम बना देंगे, नहरें निकालेंगे। कांग्रेस की जनपद सदस्य सीमा भार्गव कहती हैं भाजपा ने जमीन पर कोई काम नहीं किया। असहाय वृद्धों को न तो पेंशन मिल रही है और न ही कोई सहारा। कुछ एेसी ही राय गांव के दूसरे मतदाता भी रखते हैं।

अब तक चुनाव 14 - भाजपा-जनसंघ 11, कांग्रेस- 3  1951, 1957 एवं 1998 में
प्रत्याशी- 8, दौड़ में ये 4 - ब्रह्मानंद रत्नाकर निर्दलीय, विष्णु खत्री, जयश्री हरिकरण, ब्रह्मानंद रत्नाकर और अनीता अहिरवार।

त्रिकोणीय मुकाबले के तीन फैक्टर

भाजपा के बागी ब्रह्मानंद रत्नाकर और बसपा प्रत्याशी अनीता अहिरवार ने मुकाबले को कड़ा बना दिया
रत्नाकर के परिवार के पास शराब का पैतृक कारोबार है और एक बड़ा वर्ग उनसे जुड़ा हुआ है
पहले दलित और मुस्लिम वोट कांग्रेस को थोकबंद मिलते थे, अब बसपा इसमें हिस्सेदार बन रही है

इस क्षेत्र के चार प्रमुख मुद्दे

यहां पानी, बिजली, बाहरी और बागी चार प्रमुख मुद्दे हैं। भाजपा के बागी और निर्दलीय चुनाव लड़ रहे ब्रह्मानंद रत्नाकर दोनों ही दलों के प्रत्याशी को बाहरी बता कर जनता से समर्थन मांग रहे हैं। यह मुद्दा कुछ हद तक असर भी डाल रहा है।

समीकरण

सारा खेल बागी के रुख पर टिका है। यदि उनका स्थानीय बनाम बाहरी का नारा चल गया तो दोनों की मुसीबत बढ़ जाएगी। बैरसिया में 211010 मतदाता हैं। इनमें सबसे ज्यादा 35 हजार वोटर दलित वर्ग से हैं। इस वर्ग में भी सबसे ज्यादा तादाद अहिरवार समाज की है। जयश्री और अनीता इसी समाज से ही हैं।

चुनावी गुणा-भाग

भाजपा का पूरा जोर अपने पारंपरिक वोट बैंक को सहेजने पर है। इसके लिए उसने सांसद आलोक संजर और भगवान दास सबनानी को लगाया है। वहीं कांग्रेस की निगाहें बागी पर टिकी हैं। 15 हजार मुस्लिम वोटों पर भी उन्हें भरोसा है।

न सड़कें बनीं, न पानी मिला, स्कूल भी खाली

भाजपा ने कुछ नहीं किया। क्षेत्र में न तो सड़कें बनीं और न ही पानी की व्यवस्था हुई। स्कूल- अस्पताल खोल दिए, लेकिन टीचर्स और डॉक्टर्स नहीं हैं। विधायक लोगों को सुलभ नहीं हैं।

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